
गीता में निष्काम कर्मयोग का गूढ़ रहस्य: कर्मण्येवाधिकारस्ते का यथार्थ
कर्म फल से विरक्त होकर केवल कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की सनातन कला। क्या वास्तव में फल की इच्छा का त्याग संभव है?

॥ बोलो सीताराम ॥
॥ शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसंपदा ॥

सत्य ही संसार में ईश्वर है, और धर्म सत्य पर आधारित है। — वाल्मीकि रामायण

कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन। मा कर्मफलहेतुर्भूर्मा ते सङ्गोऽस्त्वकर्मणि॥
karmaṇy-evādhikāras te mā phaleṣhu kadāchana | mā karma-phala-hetur bhūr mā te saṅgo ’stvakarmaṇi ||
पवित्र तीर्थ, पावन ग्रंथ, दिव्य संत-चरित्र एवं कालचक्र ज्योतिष का प्रामाणिक संगम
प्रमुख धामों, ज्योतिर्लिंगों और शक्तिपीठों का प्रामाणिक इतिहास एवं दर्शन मार्ग।
गीता, रामायण और उपनिषदों के मूल श्लोक, अन्वय एवं सरल सारस्वत भावार्थ।
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दर्शन, इतिहास, व्रत-त्योहार और नित्य साधना पर विचारपरक लेख

सरयू के पावन तट पर स्थित मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु श्रीराम की जन्मस्थली का आध्यात्मिक इतिहास और नागर शैली स्थापत्य का अद्भुत दर्शन।


कर्म फल से विरक्त होकर केवल कर्तव्य पथ पर अडिग रहने की सनातन कला। क्या वास्तव में फल की इच्छा का त्याग संभव है?


सबको प्रेम करो, सबको भोजन कराओ और सत्य बोलो — आधुनिक युग में भक्ति और निष्काम सेवा का सहजतम मार्ग।

महादेव के त्रिशूल पर बसी पावन काशी नगरी — द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रधान विश्वेश्वर के दिव्य स्वरूप का दार्शनिक विवेचन।


ग्रह भाग्य के विधाता नहीं, अपितु हमारे पूर्व संचित कर्मों के फल-प्रदाता दर्पण हैं। नवग्रह शांति के सरल शास्त्रीय उपाय।


गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा अवधी में रचित मानस केवल महाकाव्य नहीं, अपितु जीवन प्रबंधन और भक्ति का संपूर्ण शास्त्र है।


शैलपुत्री से सिद्धिदात्री पर्यन्त — नवरात्रि के नौ दिन चेतना के नौ आयामों के जागरण और आत्म-शुद्धि का महापर्व हैं।
