काशी संसार की सबसे प्राचीन जीवित नगरी है। स्कंद पुराण के काशी खंड में वर्णन है कि प्रलय काल में भी काशी नष्ट नहीं होती, क्योंकि भगवान शिव इसे अपने त्रिशूल के अग्रभाग पर धारण कर लेते हैं।
१. तारक मंत्र और परम मोक्ष
काशी में देहत्याग करने वाले जीव के कान में स्वयं देवाधिदेव महादेव तारक मंत्र फूंकते हैं, जिससे वह पुनर्जन्म के चक्र से सदा के लिए मुक्त हो जाता है।
२. संतों की तपोस्थली
आदि शंकराचार्य, गोस्वामी तुलसीदास, संत कबीर, संत रविदास और तैलंग स्वामी जैसे अनगिनत सिद्धों ने काशी में ही अपनी साधना को पूर्णता प्रदान की।

