उत्तराखंड के कुमाऊं की हरी-भरी वादियों में स्थित कैंची धाम एक ऐसा दिव्य केंद्र है जहां पहुँचते ही अंतर्मन शांत हो जाता है। यहां के अधिष्ठाता पूज्य महाराज जी बाबा नीब करौरी थे।
१. आडंबर रहित सहज साधना
महाराज जी कभी कोई लंबा प्रवचन नहीं देते थे। वे केवल एक कंबल ओढ़कर बैठते थे और आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भरपेट भोजन (प्रसाद) कराते थे। उनका स्पष्ट कथन था कि भूखे पेट ईश्वर का स्मरण संभव नहीं।
२. पाश्चात्य विचारकों का आध्यात्मिक परिवर्तन
स्टीव जॉब्स और मार्क जुकरबर्ग से लेकर रिचर्ड अल्बर्ट (राम दास) तक — पश्चिमी बुद्धिजीवियों को जब संसार की सफलता खोखली लगी, तब वे कैंची धाम आए और उन्हें आंतरिक शांति की नई दिशा मिली।

