परंपरा / संप्रदाय
शाक्त-वेदांत समन्वय / माँ भवतारिणी उपासक
ऐतिहासिक काल
1836 ई. (कामारपुकुर) – 1886 ई. (कोलकाता)
मुख्य आश्रम स्थल
दक्षिणेश्वर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
आश्रम का नाम
दक्षिणेश्वर काली मंदिर व पंचवटी
॥ दिव्य जीवन दर्शन ॥
पावन जीवन चरित्र एवं साधना
जतो मत, ततो पथ — जितने मत, उतने ही ईश्वर तक पहुँचने के मार्ग हैं। माँ के प्रति अनन्य वात्सल्य और निष्काम भाव ही भक्ति का मर्म है।
दक्षिणेश्वर के परमहंस देव आधुनिक युग के परम अवतारी संत थे। उन्होंने ज्ञान, भक्ति, तंत्र, योग तथा इस्लाम और ईसाई धर्म की साधनाओं द्वारा यह प्रत्यक्ष सिद्ध किया कि सभी साधनाएं अंततः एक ही सच्चिदानंद परमात्मा तक ले जाती हैं। स्वामी विवेकानंद उनके प्रमुख संन्यासी शिष्य थे।
अमृत वचन
प्रमुख उपदेश एवं अमृत वचन
“जैसे एक ही जल को कोई पानी, कोई वाटर, कोई अक्वा कहता है, वैसे ही एक ही ईश्वर को सब विभिन्न नामों से पुकारते हैं।”
— श्री रामकृष्ण परमहंस (श्रीरामकृष्ण कथामृत)“ईश्वर लाभ ही मानव जीवन का एकमात्र सच्चा उद्देश्य है।”
— श्री रामकृष्ण परमहंस (सत्संग वचन)सम्बद्ध रचनाएं एवं ग्रंथ
श्रीरामकृष्ण कथामृतपंचवटी साधना विमर्श
साधना स्थल एवं आश्रम
दक्षिणेश्वर काली मंदिर व पंचवटी
स्थान: दक्षिणेश्वर, कोलकाता, पश्चिम बंगाल
