रचयिता / संकलनकर्ता
महर्षि कृष्णद्वैपायन वेदव्यास
मूल भाषा
संस्कृत व हिन्दी
कुल अध्याय / काण्ड
18
श्लोक / मंत्र संख्या
700 श्लोक
॥ ग्रंथ परिचय एवं संदर्भ ॥
सार एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
कुरुक्षेत्र के धर्मक्षेत्र में भगवान श्रीकृष्ण द्वारा विषादग्रस्त अर्जुन को दिया गया आत्मज्ञान, निष्काम कर्मयोग, भक्तियोग और ज्ञानयोग का सार्वभौमिक अमर उपदेश।
आध्यात्मिक महत्व एवं महात्म्य
सनातन धर्म की प्रस्थानत्रयी का सबसे लोकप्रिय और व्यावहारिक ग्रंथ। जीवन के प्रत्येक धर्मसंकट में कर्तव्य-पथ दिखाने वाला दिव्य प्रकाश-स्तंभ।
अनुक्रमणिका
कुल 18 अध्याय सूचीबद्धअध्याय एवं काण्ड सूची
1
अर्जुन विषाद योग
(अर्जुनविषादयोग)47 श्लोकपाठ पढ़ें
2
सांख्य योग (आत्मज्ञान व कर्मयोग)
(सांख्ययोग)72 श्लोकपाठ पढ़ें
3
कर्म योग (कर्तव्य पालन)
(कर्मयोग)43 श्लोकपाठ पढ़ें
4
ज्ञान कर्म संन्यास योग
(ज्ञानकर्मसंन्यासयोग)42 श्लोकपाठ पढ़ें
5
कर्म संन्यास योग
(कर्मसंन्यासयोग)29 श्लोकपाठ पढ़ें
6
ध्यान योग
(आत्मसंयमयोग)47 श्लोकपाठ पढ़ें
7
ज्ञान विज्ञान योग
(ज्ञानविज्ञानयोग)30 श्लोकपाठ पढ़ें
8
अक्षर ब्रह्म योग
(अक्षरब्रह्मयोग)28 श्लोकपाठ पढ़ें
9
राजविद्या राजगुह्य योग
(राजविद्याराजगुह्ययोग)34 श्लोकपाठ पढ़ें
10
विभूति योग
(विभूतियोग)42 श्लोकपाठ पढ़ें
11
विश्वरूप दर्शन योग
(विश्वरूपदर्शनयोग)55 श्लोकपाठ पढ़ें
12
भक्ति योग
(भक्तियोग)20 श्लोकपाठ पढ़ें
13
क्षेत्र-क्षेत्रज्ञ विभाग योग
(क्षेत्रक्षेत्रज्ञविभागयोग)35 श्लोकपाठ पढ़ें
14
गुणत्रय विभाग योग
(गुणत्रयविभागयोग)27 श्लोकपाठ पढ़ें
15
पुरुषोत्तम योग
(पुरुषोत्तमयोग)20 श्लोकपाठ पढ़ें
16
दैवासुर सम्पद् विभाग योग
(दैवासुरसम्पद्विभागयोग)24 श्लोकपाठ पढ़ें
17
श्रद्धात्रय विभाग योग
(श्रद्धात्रयविभागयोग)28 श्लोकपाठ पढ़ें
18
मोक्ष संन्यास योग (उपसंहार)
(मोक्षसंन्यासयोग)78 श्लोकपाठ पढ़ें
