रचयिता / संकलनकर्ता
महर्षि वेदव्यास जी
मूल भाषा
हिन्दी
कुल अध्याय / काण्ड
7
श्लोक / मंत्र संख्या
24000 श्लोक
॥ ग्रंथ परिचय एवं संदर्भ ॥
सार एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
देवाधिदेव महादेव शिव के प्राकट्य, ज्योतिर्लिंगों की महिमा, सती-पार्वती चरित्र, रुद्राक्ष महिमा और पंचाक्षर मंत्र (ॐ नमः शिवाय) के जप का महापुराण।
आध्यात्मिक महत्व एवं महात्म्य
अठारह महापुराणों में शिवभक्तों का सर्वोपरि ग्रंथ। इसके श्रवण से अंतःकरण निर्मल होकर शिवतत्व की साक्षात अनुभूति होती है।
अनुक्रमणिका
कुल 7 अध्याय सूचीबद्धअध्याय एवं काण्ड सूची
1
विद्येश्वर संहिता (शिवलिंग व रुद्राक्ष महिमा)
(विद्येश्वर संहिता)25 श्लोकपाठ पढ़ें
2
रुद्र संहिता - सृष्टि खण्ड
(रुद्र संहिता (सृष्टि खण्ड))20 श्लोकपाठ पढ़ें
3
रुद्र संहिता - सती चरित्र
(रुद्र संहिता (सती खण्ड))43 श्लोकपाठ पढ़ें
4
रुद्र संहिता - पार्वती विवाह
(रुद्र संहिता (पार्वती खण्ड))57 श्लोकपाठ पढ़ें
5
शतरुद्र संहिता (शिव अवतार कथा)
(शतरुद्र संहिता)42 श्लोकपाठ पढ़ें
6
कोटिरुद्र संहिता (द्वादश ज्योतिर्लिंग महिमा)
(कोटिरुद्र संहिता)43 श्लोकपाठ पढ़ें
7
कैलास संहिता (प्रणव व संन्यास विचार)
(कैलास संहिता)23 श्लोकपाठ पढ़ें
