रचयिता / संकलनकर्ता
गोस्वामी तुलसीदास जी
मूल भाषा
अवधी
कुल अध्याय / काण्ड
7
श्लोक / मंत्र संख्या
1093 श्लोक
॥ ग्रंथ परिचय एवं संदर्भ ॥
सार एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के पावन जीवन-चरित्र का सात सोपानों (काण्डों) में रचित भक्ति, मर्यादा और आदर्श जीवन का महान भारतीय महाकाव्य।
आध्यात्मिक महत्व एवं महात्म्य
उत्तर भारत के प्रत्येक घर का प्राण। परिवार, समाज, राज्य और आत्म-समर्पण की उच्चतम आदर्श कसौटी प्रस्तुत करने वाला भक्ति ग्रंथ।
अनुक्रमणिका
कुल 7 अध्याय सूचीबद्धअध्याय एवं काण्ड सूची
1
बाल काण्ड (श्रीराम प्राकट्य एवं विवाह)
(बालकाण्ड)361 श्लोकपाठ पढ़ें
2
अयोध्या काण्ड (त्याग व वन गमन)
(अयोध्याकाण्ड)326 श्लोकपाठ पढ़ें
3
अरण्य काण्ड (शबरी उद्धार व पंचवटी)
(अरण्यकाण्ड)46 श्लोकपाठ पढ़ें
4
किष्किन्धा काण्ड (सुग्रीव सख्य व हनुमान मिलन)
(किष्किन्धाकाण्ड)30 श्लोकपाठ पढ़ें
5
सुन्दर काण्ड (हनुमान पराक्रम व लंका दहन)
(सुन्दरकाण्ड)60 श्लोकपाठ पढ़ें
6
लंका काण्ड (धर्म-अधर्म संग्राम व रावण वध)
(लंकाकाण्ड)121 श्लोकपाठ पढ़ें
7
उत्तर काण्ड (रामराज्य व कागभुशुण्डि उपदेश)
(उत्तरकाण्ड)130 श्लोकपाठ पढ़ें
