रचयिता / संकलनकर्ता
वैदिक ऋषि परंपरा
मूल भाषा
संस्कृत
कुल अध्याय / काण्ड
1
श्लोक / मंत्र संख्या
18 श्लोक
॥ ग्रंथ परिचय एवं संदर्भ ॥
सार एवं आध्यात्मिक पृष्ठभूमि
ईशा वास्यमिदं सर्वं यत्किञ्च जगत्यां जगत् — इस संपूर्ण चराचर ब्रह्मांड में जो कुछ भी गतिमान है, वह सब ईश्वर से व्याप्त है। त्यागपूर्वक भोग करने का दिव्य उपदेश।
आध्यात्मिक महत्व एवं महात्म्य
१०८ उपनिषदों में सर्वप्रमुख और शुक्ल यजुर्वेद की संहता का प्रत्यक्ष भाग। कर्म और ज्ञान के असीम समन्वय का आदि स्रोत।
अनुक्रमणिका
कुल 1 अध्याय सूचीबद्धअध्याय एवं काण्ड सूची
1
अष्टादश (१८) महामंत्र
(ईशावास्य मन्त्र संकलन)18 श्लोकपाठ पढ़ें
